परिचय
RG Kar case: दोस्तों आपको याद होगा कि पिछले साल एक ऐसी घटना सामने आई थी, जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया था। इसमें एक डॉक्टर के साथ बलात्कार करके उसकी हत्या कर दी गई थी। यह एक बहुत बुरी घटना थी जिसे शायद देश नहीं भूल सकता है। इस समय पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है जिसको सुनकर हर जगह इसका जबरदस्त प्रोटेस्ट हो रहा है। कई लोग यह मान कर चल रहे थे कि जिस तरह से निर्भया वाले मामले में आरोपियों को फांसी की सजा दी गई थी, तो उसी तरह से इस मामले में भी आरोपी संजय राय को फांसी दिया जाएगा। मगर इसे तो आजीवन कारावास की ही सजा मिली है। तो संजय राय को फांसी क्यों नहीं दिया गया और उसे आजीवन कारावास ही क्यों मिला है, तो यह सारी बातें आज के लेख में आपको बताएंगे। चलिए शुरू करते हैं और सबसे पहले पूरी बात आपको बताते हैं।
पूरा मामला क्या है ?

देखिए पिछले साल 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल हॉस्पिटल में देर रात तक काम करने वाले जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार और मर्डर की घटना हो जाती है। उसके बाद पहले तो इस मामले को कोलकाता पुलिस जांच करती है, मगर बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया जाता है। उसके बाद सियालदह सत्र न्यायालय में फैसला दिया गया कि संजय राय इस वारदात का आरोपी है जिसने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर का रेप और मर्डर किया था। ऐसे में देश भर से आवाज आ रही थी कि आरोपी संजय राय को कम से कम मौत की सजा तो मिलनी ही चाहिए। लेकिन उसके बावजूद उसे आजीवन कारावास की सजा ही मिली है। अक्सर देखा जाता है कि संगीन मामले में आरोपी को फांसी से बचाने के लिए पहले उम्रकैद की सजा दे दी जाती है। उसके बाद उम्रकैद को भी आरोपी को की सजा को भी घटकर 10 साल या 15 साल तक जेल में रखकर छोड़ दिया जाता है। बहरहाल यहां पर आरोपी पर आजीवन कारावास और 50000 रूपए जुर्माना लगाया गया है। तो तमाम विरोधों के बावजूद भी दोषी को उम्र कैद की ही सजा मिल पाई है। जस्टिस अनिर्बन दास इस मामले पर निर्णय दिया और उन्होंने कहा कि पीड़िता के परिवार को 17 लख रुपए राज्य सरकार की तरफ से मिलनी चाहिए। यहां पर कहने का मतलब है कि पश्चिम बंगाल की सरकार पीड़िता डॉक्टर के परिवार को 17 लाख रुपए हर्जाने के तौर पर देगी।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी कहना था कि दोषी को कम से कम मौत की सजा तो मिलनी हीं चाहिए। मगर जब से कोर्ट का इस पर निर्णय आया, तो ममता की तरफ से बयान आया कि हम इस फैसले से खुश नहीं है क्योंकि उसे तो कम से कम मृत्यु दंड तो मिलना ही चाहिए। आगे उनका कहना था कि इस केस को जबरदस्ती कोलकाता पुलिस से सीबीआई को दे दिया गया, जिसमें सीबीआई अब मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रही है। वैसे कोर्ट ने भी कोलकाता पुलिस को इस बात को लेकर डांटा था कि आपकी जांच सही तरीके से नहीं हो रही है क्योंकि इस केस को आप आत्महत्या के तौर पर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जो सही नहीं है।
फांसी की सजा क्यों नहीं दी गई ?
अब सबसे पहला सवाल आता है कि कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा क्यों नहीं दे सकी ? देखीए जज का कहना था कि यह अपराध Rarest of rare कैटेगरी में नहीं आता है। कुछ साल पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि भारत में फांसी की सजा Rarest of rare केस में ही हो सकती है, दूसरी चीजों में ऐसा नहीं हो सकता है। उनके कहने का मतलब था की ज्यादातर मामले में दोषी को उम्र कैद की ही सजा हो सकता है। ऐसे में सत्र न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट का फैसला साक्ष्य और गवाह के आधार पर ही होता है और आरोपी को प्रॉपर कस्टडी में लेकर पूरी पूछताछ की गई मगर उसमें ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे उसे फांसी की सजा दी जा सके। तो ऐसा जज का कहना था।
संजय राय को उम्र कैद की सजा क्यों हुई ?
अब सवाल आता है कि संजय राय को उम्र कैद की सजा क्यों हुआ ? यहां पर जस्टिस अनिर्बान दास कहते हैं कि इस अपराध के लिए दोषी को उम्र कैद की सजा सही है। जज ने कहा कि यह घटना नींदनीय जरूर है, मगर फिर भी यह रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर केस में नहीं आता है। आगे उन्होंने कहा कि जो आरोपी है, अगर उसे मृत्युदंड दे भी दी जाती है, लेकिन वह यह बताता कि हम आगे से ऐसा गलती नहीं करेंगे और एक अच्छा नागरिक बनने की कोशिश करेंगे। तब ऐसे में कोर्ट की जिम्मेदारी होती है कि उस शख्स को मौत की सजा ना सुनाएं क्योंकि एक इंसान होने के नाते उसे कम से कम एक मौका तो जरुर मिलनी चाहिए, जिससे उसकी मौत ना हो। ऐसे में उसे उम्रकैद की सजा दी गई है।
कोर्ट में क्या-क्या दलीलें दी गई ?
सीबीआई ने तो कहा कि इस केस को रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर कैटेगरी में रखा जा सकता है। अगर हम दोषी को कम से कम मौत की सजा नहीं सुनाएंगे, तो उससे लोगों का कानून से भरोसा उठ सकता है और न्याय के लिए दूसरे कदम अपनाने लग जाएंगे। ऐसे में लोगों का लीगल सिस्टम में विश्वास बनाए रखने के लिए दोषी को मृत्यु दंड तो मिलना ही चाहिए।
इसी तरह से वारदात का शिकार हुए पीड़िता के परिवार का भी यही कहना था कि जो काम संजय राय ने किया है, उसमें उसे माफी नहीं मिल सकती है। पीड़िता डॉक्टर की तरफ से बोला गया की संजय राय ने जो अपराध किया है वह एक धोखा भी है क्योंकि वह सिविल वालंटियर के तौर पर आरजी कर मेडिकल कॉलेज में काम करता था और उसकी ड्यूटी थी कि डॉक्टर को प्रोटेक्ट किया जाए। मगर इसके उलट उसने डॉक्टर को ही टारगेट किया। इसलिए यह ऐसा धोखा है जिसे माफ नहीं किया जा सकता है और इसलिए उसे कम से कम मौत की सजा तो मिल नहीं चाहिए।
अब आपको संजय राय की वकील की तरफ से जो बोला गया, उसके बारे में भी बताते हैं। उन्होंने कहा हम मानते हैं कि इसने अपराध किया है, मगर इसके लिए इसे ज्यादा से ज्यादा उम्र कैद ही दिया जाना चाहिए और उन्होंने संजय राय के डिफेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया है तथा इसे भी उम्र कैद की ही सजा मिलनी चाहिए।
संजय राय ने कोर्ट में क्या कहा ?
अब आपको बताते हैं कि संजय राय ने कोर्ट में क्या बताया है। देखिए कोर्ट में संजय राय ने अब तक यह नहीं स्वीकार किया है कि उसी ने ऐसा किया है। वह अब तक कह रहा है कि वह निर्दोष है और उसे जबरदस्ती फसाया गया है। उसने आगे बताया कि पुलिस कस्टडी में भी उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ है और मारपीट कर उसे बलपूर्वक सारे पेपर पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। उसका कहना है कि जब कोलकाता पुलिस से सीबीआई को केस सौंपा गया था, तब सीबीआई ने उसकी रेलवे मेडिकल रिपोर्ट में जांच कराया था। लेकिन उसमें भी कोई प्रूफ निकलकर नहीं आया था लेकिन उसके बावजूद उसे जबरदस्ती फसाया जा रहा है। संजय राय से कोर्ट में उसके परिवार के बारे में पूछा गया, तो उसने बताया कि उसकी मां और एक बहन है। मगर उससे अब तक कोई भी मिलने नहीं आया है।
क्या भारत में संभव है फांसी की सजा ?
देखिए मौत की सजा ना सिर्फ भारत बल्कि दुनिया में विवाद का विषय माना जाता रहा है और इसको लेकर सोसाइटी में बार-बार डिसकस भी होता रहता है। इससे पहले आपको निर्भया केस याद होगा जिसमें चार दोषियों को 8 साल बाद फांसी दी गई थी और इसमें एक नाबालिक भी शामिल था, जो सजा काटकर छूट गया था। इससे पहले मूठलगू 2000 ईस्वी में एक मूठलगू केस आया था जिसमें मूठलगू को फांसी की सजा दी गई क्योंकि तमिलनाडु में इसने एक ही परिवार के पांच लोगों का मर्डर कर दिया था। उसके बाद इंदिरा गांधी के हत्यारे सतवंत सिंह और कहर सिंह को भी फांसी की सजा दी गई थी।
लेकिन अब भी देश में फांसी की सजा को लेकर विवाद होता रहता है कि क्या यह देना सही है अथवा नहीं। कुछ लोग कहते हैं की फांसी की सजा होनी चाहिए जिससे लोगों में कानून को लेकर डर हो। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि ऐसा तो नहीं होना चाहिए क्योंकि किसी इंसान को मारने का हक हमारे पास नहीं है। ऐसे में फांसी की सजा को उम्र कैद में बदल देना चाहिए। तो ऐसे तर्क कई बार दिए जाते हैं।
तो इसको लेकर आप क्या सोचते हैं हमें जरूर बताइएगा। लेकिन आपको यह भी बता दूं कि कोर्ट ने पुलिस और हॉस्पिटल दोनों को ही डांट लगाई है और कहा कि शुरू में डॉक्टर के मर्डर को सुसाइड दिखाने की कोशिश क्यों की गई। आपको मालूम होगा आरजी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संदीप घोष पर भी आरोप लगे थे कि उसने साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की है और पूरे मामले को सुसाइड दिखाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में इसको लेकर बहुत सारे सवाल उठ रहे थे। मुझे उम्मीद है कि आपको पूरी बात समझ आई होगी कि आरोपी को इस समय क्यों उम्र कैद की सजा ही हुआ है। आप अपनी सुझाव और शिकायत हमें जरूर बताइएगा। धन्यवाद