Illegal immigrants: दिल्ली में पकड़ाया बांग्लादेश का नेटवर्क

Illegal immigrants : दोस्तों नमस्कार जब भी हम अवैध अप्रवासियों की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में अमेरिका आता है। अमेरिका में इस बार डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीते हैं और बार-बार कहते हैं कि अमेरिका में बहुत सारे अवैध अप्रवासी रह रहे हैं और इसलिए हम उन्हें भगाना चाहते हैं। यहां पर यह विषय न सिर्फ अमेरिका बल्कि भारत से भी संबंधित है। भारत में भी घुसपैठिया बहुत बड़ा मुद्दा है, जिसमें हमारे पड़ोसी देश (नेपाल, पाकिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार) से बहुत सारे अवैध अप्रवासी आते रहे हैं। इसलिए यह बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन जाता है। अभी हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक इसी तरह के नेटवर्क का खुलासा किया है, जो उन घुसपैठियों को हमारे पड़ोसी देश से भारत आने में मदद करता था। यह नेटवर्क बांग्लादेश से भारत आने वाले लोगों का जाली आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाता था। लेकिन इस नेटवर्क के बारे में दिल्ली पुलिस को पता चल गया है। आज के इस लेख में आपको बताएंगे कि यह सब हुआ कैसे, कैसे यह लोग बांग्लादेश से भारत आते थे, कैसे इनका डॉक्यूमेंट तैयार होता था और इसको रोकना क्यों जरूरी हो जाता है। तो यह सब आपको इस लेख में बताएंगे और आपको काफी कुछ जानने को मिलेगा। चलिए शुरू करते हैं।

पूरा मामला क्या है ?

यहां पर सबसे पहले पूरी घटना के बारे में आपको बताते हैं। देखिए शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद से भारत बांग्लादेश के संबंध बहुत खराब स्थिति में है, जिससे बांग्लादेश के अंदर भारत विरोधी भावनाएं काफी तेजी से बढ़ रही है। इसी बीच खबर आती है कि दिल्ली पुलिस अवैध अप्रवासी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसमें बोला जा रहा है कि यह नेटवर्क बांग्लादेश के लोगों की मदद करता था भारत के डॉक्यूमेंट (आधार कार्ड और पैन कार्ड) को फर्जी तरीके से बनवाने में, जिससे वो भारत में कहीं पर भी घूमने जाएं या ऑनलाइन कुछ खरीदे, तो वहां पर इन डॉक्यूमेंट को दिखा सके। ऐसे में ये लोग भारत के अंदर धीरे-धीरे बसने लग जाए।इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने यहां पर इस नेटवर्क से जुड़े 10 -12 लोगों को पकड़ा हुआ है, जिसमें यह लोग फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाते थे। यह लोग फेक वेबसाइट के द्वारा इस तरह की नकली डॉक्यूमेंट बनाते थे।

यहां पर मैं आपको बता दूं कि जितने भी लोग गिरफ्तार हुए हैं उनको लेकर दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर वी के सक्सेना ने 10 दिसंबर को दिल्ली पुलिस को यह निर्देश दिया था कि उन्होंने कि आप अगले दो महीने पूरी तरह से जांच कीजिए जिससे जो अवैध बांग्लादेशी दिल्ली के अंदर रह रहे हैं, उनकी पहचान की जा सके और उन्हें यहां से फिर से बांग्लादेश निर्वासित कर दिया जाए। इसके बाद मुख्य सचिव और पुलिस कमिश्नर ने ऑपरेशन ऑल आउट चलाया, जिसमें उन्होंने दिल्ली के कोने-कोने जाकर डॉक्यूमेंट की जांच करनी शुरू करदी । जिससे वहां पर इस समय बहुत लोग गिरफ्तार किया जा रहे हैं। यहां पर करीब 800 से 1000 ऐसे लोगों की पहचान कर ली गई है, जिनके पास फर्जी डॉक्यूमेंट है। यह लोग सही मायने में भारत के नागरिक नहीं है, बल्कि अवैध रूप से यह लोग भारत के अंदर रह रहे हैं।

कैसे घुसते हैं बांग्लादेशी भारत में ?

इस समय दिल्ली पुलिस को जिस नेटवर्क के बारे में पता चला है, उसके बारे में लोग यह जानना चाहते हैं कि बांग्लादेश से लोगों को भारत कैसे लेकर आया जाता है? आपको बता दूं यहां पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि यह बांग्लादेशियों को फर्जी आधार कार्ड मतलब ऐसा आधार कार्ड जिसे अगर आप ऑनलाइन देखें तो भारत सरकार की वेबसाइट पर आपको नहीं मिलेगा।इस तरह यह लोग अपने तरीके से भारत सरकार के आधार कार्ड की ही तरह कॉपी आधार कार्ड बांग्लादेशियों का बना देते हैं, जो भारत सरकार के पोर्टल पर मौजूद ही नहीं होता है। देखिए जब भी हम स्कूल, कॉलेज या बैंक जाते हैं तो वहां पर हमारे पास जो आधार कार्ड होता है उसे ही दिखाते हैं। वहां पर गार्ड यह नहीं देखते कि यह कार्ड वैलिड है या नहीं। जब आईडी दिख गया, तो उन्हें सब कुछ क्लियर हो जाता है कि यह भारत सरकार की ही आईडी है। ऐसे में यह जो नेटवर्क है वह बांग्लादेशियों को फेक आईडी बनाकर देते हैं, जिससे वह आसानी से यहां पर रह सके। उसके बाद अगर आपको बताएं कि यह भारत में कैसे घुसते हैं, तो यह जंगल के द्वारा भारत आ जाते हैं और उसके बाद ट्रेन में बैठकर भारत के कोने-कोने तक पहुंच जाते हैं। जब एक बार यह बांग्लादेशी भारत आ जाते हैं, उसके बाद फर्जी आईडी से सुरक्षा एजेंसियों के आंखों में धूल झोंककर भारतीय नागरिक बनकर रहने लग जाते हैं और यहां के नागरिकों को मिलने वाले सभी मूल अधिकार और सरकारी योजना का लाभ लेते रहते हैं।

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दिल्ली पुलिस को इस रैकेट के बारे में कैसे पता चलता है ?

अब आपको बताता हूं कि दिल्ली पुलिस को इस रैकेट के बारे में कैसे मालूम हुआ। तो दिल्ली के साउथ में संगम विहार है, जहां पर एक हत्या को लेकर जांच की गई दिल्ली पुलिस के द्वारा, जिसमें सेंटू शेख की हत्या कर दी गई थी। बोला जा रहा है कि सेन्टू शेख भी बांग्लादेशी था, जिसने अपना नाम दिल्ली में राजा रख लिया था। जब पुलिस इसकी हत्या को लेकर जांच कर रही थी जिसमें पुलिस 4 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया था क्योंकि यह चारों लोगों ने इस बात को मान लिया कि उसी ने ही सेंटू शेख की हत्या की है। इसके बाद आगे की जांच में पुलिस को एक बड़ा नेटवर्क के बारे में पता चला कि अवैध अप्रवासी का दिल्ली के अंदर बहुत बड़ा रैकेट चल रहा है।

जिन चार लोगों को पकड़ा गया उनमें मिदुल मियां अपना नाम आकाश अहमद रख लिया था। उसके बाद फरदीन अहमद अपना नाम अभी अहमद रख लिया था। यहां पर मिदुल मियां और फरदीन अहमद कपल है और इसके अलावा मिदुल की दो और पत्नियां भी हैं। बोला जा रहा है कि यह सभी भारत में अवैध रूप से घुसकर आ गए थे और दिल्ली के संगम विहार में एक साल से ज्यादा समय से गलत डॉक्यूमेंट के साथ रह रहे थे। इनसे जब पूछताछ हुई तो उनके पास से बांग्लादेश की असली आईडी भी मिली है।

गैंग का पर्दाफाश कैसे हुआ ?

अब आपको बताते हैं की गैंग के बारे में कैसे पता चला। जब सेण्टु शेख के हत्या के बाद पकड़े गए आरोपियों से और पूछताछ किया गया, उसके बाद पता चलता है कि इसके पीछे तो एक बहुत बड़ा नेटवर्क है जो इन लोगों की मदद भारत आने में करता है। इसके बाद पुलिस दिल्ली में कई जगह पर दबिश देने पहुंच गई, जिससे यह लोग जिस तरह से नकली आधार और पैन बनाते हैं ,उन सभी को पकड़ा जाए। सेण्टु शेख के घर से पुलिस को 21 आधार कार्ड 4 वोटर आईडी और आठ पैन कार्ड मिले। इससे यह साबित होता है की यहाँ फर्जी डॉक्यूमेंट का नेटवर्क चल रहा था ।आगे की जांच में यह भी पता चला कि दिल्ली में रोहिणी के सेक्टर 5 में एक पूनम ऑनलाइन कंप्यूटर सेंटर से आधार और पैन को प्रिंट करके इन बांग्लादेशियों को दे दिया जाता था।

दिल्ली पुलिस बता रही है कि यह सब कुछ 2021 से ही ऑपरेट हो रहा है और जिस शख्स से सेंतु शेख की हत्या हुई, वह बांग्लादेशियों को भारत लाने के लिए बिचौलिए का काम करता था। मतलब जिन बांग्लादेशियों को भारत आना होता था, वह सेण्टु शेख के संपर्क में आता था और तब सेण्टु शेख उनका भारतीय फर्जी डॉक्यूमेंट बनवाकर दे देता था। अब इसको लेकर आगे जांच में सही गलत निकल कर आएगा और तभी यह पता चलेगा कि फर्जी डॉक्यूमेंट के लिए सेण्टु शेख को पेमेंट मिलता था या नहीं। मगर यहां पर बोला जा रहा है कि इसने पिछले 4 वर्षों में 100 से भी अधिक बांग्लादेशी लोगों को भारत में बसाने की कोशिश की है। इसमें अब तक तो सिर्फ चार लोग ही पकड़े गए हैं लेकिन आगे और भी लोगों को पकड़े जाने का अनुमान है।

राजनीति गरमा गयी है !

अब इस पर राजनीति तो होनी ही थी, जो शुरू हो गई है। बीजेपी आरोप लगा रही है आम आदमी पार्टी पर, कि वह तो प्रवासियों को जिनमें बांग्लादेशी और रोहिंग्या है, उनको आश्रय दे रही है। बीजेपी का कहना है कि केजरीवाल दिल्ली के अंदर अवैध अप्रवासियों के कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं और बीजेपी यह भी कह रही है कि अरविंद केजरीवाल गलत तरीके से बीजेपी पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने पूर्वांचल वोटर कार्ड को कैंसिल कर दिया है, मगर अब यहां पर पता चल रहा है कि यह तो अवैध अप्रवासी हैं लेकिन आम आदमी का कहना है कि दिल्ली पुलिस तो केंद्र सरकार के अंदर काम करती है, तो अगर कुछ गलत काम हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी अंतिम रूप से केंद्र की ही होनी चाहिए।

भारत को इस मामले को निपटाना क्यों जरुरी है ?

अब सवाल है भारत को रोहिंग्या और बांग्लादेश के अवैध अप्रवासियों से संबंधित मामले को जल्द से जल्द हल कर लेना चाहिए। अगर बांग्लादेश के साथ भारत की सीमा की लंबाई देखे, तो वह 4096 किलोमीटर है। भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय से ही बहुत से बांग्लादेशी भारत में आना शुरू कर दिए थे और 1971 के युद्ध में बहुत से बांग्लादेशी यहां गलत तरीके से आकर बस गए थे। उनके पास यहां के नागरिक होने का कोई प्रूफ नहीं है, लेकिन रिपोर्ट की माने तो इस समय भारत में डेढ़ करोड़ अवैध अप्रवासी रह रहे हैं, जो बहुत बड़ी संख्या है।

यहां पर जो समस्या है वह यह की जिस समय पर बांग्लादेश में शेख हसीना तफ्त पलट हुआ था, तो उसके बाद भारत को इस बात की आशंका है कि अवैध अप्रवासी हमारे देश में भर जाएंगे। इसलिए इनको रोकना जरूरी हो जाता है क्योंकि अगर यह एक बार भारत में आ गए, तो उसके बाद इनको पहचान करके बांग्लादेश भेजना बहुत मुश्किल होगा। तो बहुत सारी समस्याएं हो सकती है यहां पर। इसलिए इसे रोकना जरूरी हो जाता है।

आपको हमारा यह ब्लॉक कैसा लगा, और अगला ब्लॉक किस घटना पर लिखूं, उसे हमें कमेंट में बताइएगा जिससे उसे पर मैं अगले लेख में उसी टॉपिक के साथ आपसे मिल सकूं।

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